कौशाम्बी।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशाम्बी में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित ’’प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’’ आज अपने सफल 10 वर्ष पूरे कर चुका है। भारत सरकार द्वारा जून 2016 में शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत हर महीने की 9 तारीख को सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जाता है।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रो0 (डा0) हरिओम कुमार सिंह ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दूसरी और तीसरी तिमाही (गर्भावस्था के 4 से 9 महीने) की गर्भवती महिलाओं को न्यूनतम एक व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित कराना है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ’’निःशुल्क’’ उपलब्ध कराई जाती है।
अभियान की मुख्य विशेषताएं एवं उपलब्ध सेवाएं-
1. स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशाम्बी में स्त्री रोग विशेषज्ञों और फिजिशियन द्वारा गर्भवती महिलाओं की विशेष रूप से स्वास्थ्य जांच की जाती है।
2. निःशुल्क पैथोलॉजी एवं डायग्नोस्टिक्स शिविर के दौरान हीमोग्लोबिन, यूरीन एल्ब्यूमिन, ब्लड शुगर, एचआईवी, सिफलिस, ब्लड ग्रुपिंग और आवश्यकतानुसार अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांचें बिना किसी शुल्क के की जाती हैं।
3. दवाइयों का मुफ्त वितरण जांच के बाद महिलाओं को आयरन, फॉलिक एसिड, कैल्शियम सप्लीमेंट्स और अन्य आवश्यक दवाइयां मुफ्त दी जाती हैं।
4. उच्च जोखिम वाली गर्भधारण (एच0आर0पी0) की पहचान जिन महिलाओं में गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप या मधुमेह जैसी जटिलताएं पाई जाती हैं, उन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के रूप में चिह्नित कर उनके ’मातृ एवं बाल संरक्षण (एम0सी0पी0) कार्ड पर लाल स्टिकर लगाया जाता है, ताकि भविष्य में उनकी विशेष ट्रैकिंग और सुरक्षित प्रसव कराया जा सके। सामान्य मामलों के लिए हरा स्टिकर दिया जाता है।
साथही प्रधानाचार्य ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की बेहतर ट्रैकिंग के लिए सरकार द्वारा विस्तारित पी0एम0एस0एम0ए0 भी चलाया जा रहा है। इसके तहत जोखिम वाली महिलाओं को प्रसव के 45 दिनों बाद तक ट्रैक किया जाता है, ताकि मां और बच्चे दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहें। इस उपलक्ष्य पर प्रधानाचार्य महोदय द्वारा चिकित्सालय मे आई समस्त गर्भवती महिलाओं को फल वितरित करते हुए उत्तम स्वास्थ्य की शुभकामानाएं दी।
रिपोर्ट - कामता प्रसाद चौरसिया



