कौशाम्बी समाचार
बारा ब्लाक कौशाम्बी l श्री मदभागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा का चौरसिया वाटिका निकट अक्षित फ्यूल सेंटर माढ़ी बारा ब्लाक कौशाम्बी मे दिनांक 3 अप्रैल 2025 से 9 अप्रैल 2025 तक श्री मदभागवत कथा का आयोजन चल रहा है l जिसका समापन एवं विशाल भंडारा दिनांक 10 अप्रैल 2025 को सम्पन्न होगा l
मुख्य यजमान अक्षित चौरसिया ने समस्त छेत्र वासियो एवं चौरसिया समाज के लोगो से आकर कथा श्रावण करने एवं भंडरा मे प्रसाद ग्रहण करने का अनुरोध किया है l
जिसके कथा ब्यास पंडित श्याम सुन्दर पाठक जी महराज हरिद्वार द्वारा भागवत कथा का मधुर ज्ञान दिया जा रहा है l कथा समय 2 बजे से 5 बजे तक चल रही है l
इस श्री मदभागवत कथा के मुख्य यजमान अक्षित चौरसिया है जिनके चौरसिया वाटिका मे यह भागवत कथा चल रही है l कथा के तीसरे दिन
कथा ब्यास पंडित श्याम सुन्दर पाठक जी ने बालक ध्रुव के चरित्र का वर्णन किया कि कैसे पाँच वर्ष की अवस्था मे वह अपने पिता की गोद मे बैठना चाहते थे परन्तु सौतेली माँ उनको हमेशा पिता से उनको दूर भगाती रहती ज़ब वह यह बृतांत अपनी माँ से बताते तो माँ भगवान की गोद मे बैठने को कहती महर्षि नारद के मार्गदर्शन मे बालक ध्रुव ने घोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें अपने गोद मे बैठाया और उन्हें भक्त वात्सल्य प्रेम से परिपूर्ण कर
ध्रुव पद प्राप्ति का वरदान दिया, जो कि एक ऐसा पद है जो कभी नष्ट नहीं होता।आज भी ध्रुव तारा के रूप मे वह प्रकाश वान हो रहे है l
अजामिल की कथा के बारे मे उन्होंने कहा की
अजामिल की कथा हमें भगवान की कृपा और भक्ति के महत्व के बारे में सिखाती है। अजामिल एक पापी व्यक्ति था जिसने अपना जीवन पाप कर्मों में बिताया था। लेकिन जब उसने भगवान विष्णु का नाम लिया, तो उसकी सभी पापों से मुक्ति हो गई और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
बालक प्रहलाद की कथा श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा है। यह कथा हमें भगवान की भक्ति और दृढ़ संकल्प की शक्ति के बारे में सिखाती है।उन्होंने भक्त प्रहलाद की कथा का वर्णन करते हुये कहा
प्रहलाद एक छोटे बालक थे जो कि राजा हिरण्यकश्यप के पुत्र थे। हिरण्यकश्यप एक असुर राजा था जो भगवान विष्णु का घोर विरोधी था। वह नहीं चाहता था कि उसके पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु की भक्ति करें।
लेकिन प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने में बहुत आनंद आता था। वह अपने गुरु से भगवान विष्णु की कथा सुनता था और उनकी भक्ति करता था। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन प्रहलाद ने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी।
एक दिन, हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को मारने का निर्णय किया। उसने अपने सेवकों से कहा कि वे प्रहलाद को मार दें। लेकिन जब सेवकों ने प्रहलाद को मारने की कोशिश की, तो भगवान विष्णु ने उन्हें बचाया।
भगवान विष्णु ने प्रहलाद को बचाने के लिए नरसिंह अवतार लिया। नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप को मारा और प्रहलाद को बचाया।
इस कथा से हमें यह सीखने को मिलता है कि भगवान अपनी भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें कभी नहीं छोड़ते। यह कथा हमें भगवान की भक्ति और दृढ़ संकल्प की शक्ति के बारे में सिखाती है।
इसलिए, हमें इन कथाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने जीवन में भगवान की भक्ति और सेवा को अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर छेत्र के साथ चौरसिया समाज के काफ़ी संख्या मे गणमान्य भक्त गण मौजूद रहे l
रिपोर्ट : शिवम चौरसिया, कामता प्रसाद चौरसिया



